उज्जैनमध्य प्रदेश

हायर सेकेंडरी में से 21 विषय खत्म किए

विशेषज्ञ शिक्षक नाराज

उज्जैन। माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्य प्रदेश, भोपाल (MPBSE) ने हायर सेकेंडरी (11th-12th) व्यवसायिक पाठ्यक्रम में 21 विषयों को हटा दिया है। अब इन विषयों में स्टूडेंट्स को एडमिशन नहीं मिलेगा। बोर्ड का कहना है कि इन विषयों में एडमिशन नहीं आ रहे थे और हमारे पास टीचर भी नहीं है। जबकि हायर सेकेंडरी के विशेषज्ञों का कहना है कि सभी विषय स्टूडेंट्स के लिए काफी उपयोगी है और इन्हें घटाने के बजाय बढ़ाना चाहिए। माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश का यह फैसला आत्मनिर्भर भारत अभियान के खिलाफ है
इन विषयों को हटाया गया
एग्रीकल्चरल बिजनेस मेनेजमेंट, पोल्ट्री फॉर्मिंग, ऑफिस मैनेजमेंट, डेयरी फॉर्मिंग, फोटोग्राफी, वेल्डिंग टेक्नॉलॉजी एंड फेब्रीकेशन, हॉस्पिटल हाउस कीपिंग, लेदर टेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल डिजाइनिंग, विड गुड्स मेकिंग एंड कार्विंग, एक्सरे टेक्नीशियन, नरिसिंग एंड मिडवाइफरी, फैशन डिजाइनिंग एंड गारमेंट मेकिंग, मार्केटिंग एंड सेल्समेनशिप, को ऑपरेटिव मैनेजमेंट, फॉर्म मैकेनिक्स, प्रिंटिंग बाइंडिंग, फ्रूट्स एंड वेजिटेबल प्रिजर्वेशन, बेकरी, बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन, मोपेड, स्कूटर, मोटर साइकिल रिपेयर।
अब केवल इन विषयों में एडमिशन
जारी आदेश के मुताबिक एमपी बोर्ड 11वीं और 12वीं में हार्टिकल्चर, बुक कीपिंग एंड एकाउंटेंसी, गारमेंट मेकिंग-कॉस्च्यूम डिजाइनिंग एंड टेलरिंग, रिपेयर ऑफ रेडियो एंड टीवी, रिपेयर ऑफ इलेक्ट्रिक डोमेस्टिक एप्लाइंसेज, बैंकिंग असिस्टेंस, स्टोर कीपिंग, कंप्यूटर एप्लीकेशन, मेडिकल लेबोरेट्री टेक्नोलॉजी और स्टेनो टाइपिंग कोर्सों में अब रेगुलर एडमिशन दिया जाएगा।

घोषणा को यदि अमली जामा पहनाया जाता है तो उज्जैन के भी शिक्षक हो जाएंगे अतिशेष
यदि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने अत्याधुनिक शासकीय विद्यालय की घोषणा को अमली जामा पहनाया तो प्रदेश के साथ ही उज्जैन में भी कई शिक्षक अतिशेष हो जाएंगे। यह बात मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने कही है।
संघ का कहना है कि हाल ही में मुख्यमंत्री ने जिन 10000 अत्याधुनिक शासकीय विद्यालयों की घोषणा की है, यदि अवधारणा फलीभूत हो गई तो उज्जैन समेत मध्य प्रदेश के एक लाख से ज्यादा शिक्षक अतिशेष हो जाएंगे और आने वाले कई सालों तक शिक्षकों की भर्ती करने की जरूरत ही नहीं बचेगी। संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष कन्हैयालाल लक्षकार ने बताया कि राज्य शिक्षा केंद्र के आदेश क्रमांक/राशिके/ईएण्डआर/2020/60, भोपाल दिनांक 28/09/2020 परिपत्र-1 के अनुसार प्रदेश में कुल 10,000 विद्यालयों को सर्वसुविधा युक्त रूप में विकसित करना प्रस्तावित है। आदेशानुसार स्कूल चिन्हांकन मापदंड सीएम राइज के भौतिक सत्यापन व चयन प्रक्रिया के तहत प्रत्येक जनशिक्षा केंद्र में ऐसे “चार” विद्यालय स्वीकृत किये जाएंगे। इनमें न्यूनतम 1000 छात्र-छात्रा दर्ज किये जाएंगे। अवधारणा है कि सर्वसुविधा युक्त विद्यालय में नर्सरी से 12वीं तक कक्षाओं का संचालन किया जावेगा। इनमें “कक्षा कक्ष, खेल मैदान, लाइब्रेरी, कम्प्यूटर, लेबोरेट्री” से सुसज्जित करने के लिए आसपास की बसाहटों के केंद्र में होना चाहिए। बसाहटों में संचालित विद्यालयों को बंद कर कम से कम दूरी से छात्रों को परिवहन कर लाया जावेगा। प्रदेश में कुल 3407 जनशिक्षा केंद्रों में औसत 2000 विद्यार्थियों का नामांकन है। व्यवस्था परिवर्तन से प्रत्येक जनशिक्षा चार-चार विद्यालय प्रस्तावित है, ऐसे तीन-तीन विद्यालय भी खोले गये तो प्रदेश भर में संचालित हजारों PS, MS, HS, HSS का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। विद्यालयों के साथ हजारों शिक्षक अतिशेष की स्थिति में आ जाएंगे। इस व्यवस्था से वर्षो तक शासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाएगा। वैसे भी 2012-13 के बाद शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है। नई व्यवस्था को अमलीजामा पहनाया जाता है तो शिक्षकों की सेवाएं तो प्रभावित होगी ही साथ ही बीएड/डीएड प्रशिक्षित बेरोजगारों के मंसूबों पर भी पानी फिरने वाला है। नर्सरी से बारहवीं तक कक्षाओं के लिए छात्रों को परिवहन के समय दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावनाएं बनी रहेगी, इससे सुरक्षा का खतरा किसी से छिपा नहीं है। प्रतिवर्ष छात्रों के परिवहन के समय वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने से नौनिहालों को काल-कवलित होते देखा है। प्रभावित परिवार के दुःख का अहसास करने से ही सिरहन पैदा हो जाती है।

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