Uncategorizedउज्जैन

संभलकर मेटिंग पीरियड आक्रमाक हो रहे श्वान

चौपाहिया वाहनों पर भी कर रहे हमला, आदेश पूरे देश में नहीं पकड़ा जा सकता इनको

उज्जैन। संभलकर चलिए चाहे आप दो पहिया, चौपहिया वाहन पर हो या पैदल आवारा श्वान आप कभी भी हमला कर सकेत है। एक तरफ आवारा श्वानों की शहर में भरमार, दुसरी तरफ इनके पकड़ने पर रोक और तीसरी तरफ इनका मेटिंग पीरियड चलना कुल मिलाकर नुकसान शहरवासियों का ही है। समझदारी इसी में है कि आप जब भी निकले संभलकर, सावधानी रखते हुए चले।
पिछले कुछ समय में देखने में यह आ रहा है कि शहर में आवारा श्वान अचानक आक्रामक हो गये है। ये किसी भी समय और किसी पर भी कभी भी हमला कर रहे है। हाल ही में इनके काटने के मामलों में भी इजाफा हुआ है। जहां कई छोटे बच्चे इनकी चपेट में आए है वही बुजुर्गो पर हमला करने में भी नहीं चूक रहे। मामले में जब इनके जानकारों से चर्चा की गई तो कई कारण इनके आक्रामक होने के सामने आए है। फिलहाल तो अभी इसका प्रमुख कारण इनमें चल रहा मेटिंग पीरियड है। इस समय ये ज्यादा आक्रामक हो रहे है वही श्रेष्ठता साबित करने के चक्कर में भी ये आपस में झगड़ते रहते है ऐसे में यदी कोई नागरिक असावधानी वश इनके बीच में आ जाए तो उसका प्रभावित होना आवश्यक ही है। चौपहिया वाहनों पर  इनके द्वारा किये जा रहे हमलो को लेकर बात की गई तो डॉक्टर आर.के. जोशी का कहना था कि वे अपने एक परिचित से मिलने कार से जा रहे थे तो उनके वाहन पर भी श्वानो के एक समुह ने हमला कर दिया। उन्होने तत्काल आगे जाकर कार रोकी और इस हमले के कारण को समझने की कोशिश की। पता चला की श्वान के एक छोटे से बच्चे की एक चौपहिया वाहन की चपेट में आ जाने से मृत्यु हो गई थी। उसके बाद से ही श्वानो का वो दल वहा से निकलने वाली हर गाड़ी पर हमला कर रहा है। चूंकि सीजन है बच्चों का इसलिए हर क्षेत्र में ये वाहनों की चपेट में भी आते जा रहे है। इधर सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी पूरे देश में लागु है कि इन्हे पकड़ा नहीं जाए इसलिए नगर पालिका निगम भी इसमें कुछ नहीं कर पा रही है। इधर इनकी बड़ती संख्या और शहरवासियों पर हो रहे इनके हमले में समझदारी यही है कि हम खुद संभलकर चले।
बॉक्स
लॉकडाउन के बाद से भी बड़ी मुश्किले
मार्च माह के बाद से भी आवारा श्वान मामलों में दिक्कते बड़ी है। एक तरफ लॉकडाउन के चलते इनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं था वहीं श्वान प्रेमियों ने भी उन्हे भुखा नहीं रहने दिया। दुसरी तरफ बंद के दौरान सड़के सुनी थी लेकिन लॉकडाउन खुलते ही हलचल बड़ गई इसके चलते भी इनके व्यवहार में परिवर्तन आया है।
प्रधानमंत्री ने भी कहा इन्हें पाले बाहर की ब्रीड नहीं
मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा है कि आम जन इंडियन ब्रीड पाले महंंगे विदेशी श्वान नहीं का जीक्र करते हुए ऐनिमल वेलफेयर एक्टीविस्ट अर्पूवा जैन कहती है कि इन्हे अपने घरों में पालना ही बेहतर होगा। दुसरा उपाय इनकी नंस बंदी है जिसका टंडर नगर निगम ने एक संस्था को दिया है लेकिन उसका काम संतोषजनक नहीं। बकौल अर्पूवा श्वानों को जहा से उठाया जाना है नस बंदी कर वही छोडना है इससे काफी हद तक इनके हमलो से बचा जा सकेगा। आपका कहना है कि इनके फीडिंग सेन्टर्स भी अनेक स्थानों पर बनाए जाना आवश्यक होगा क्योकि स्वचछता अभियान के चलते इन्हे सड़को पर भोजन भी नहीं मिल रहा है।

वर्तमान में इनका मेटिंग पीरियड चल रहा है इसलिए भी ये आक्रामक हो रहे है। बड़ती संख्या और चौपहिया वाहनों की चपेट में आने से भी ये हमले कर रहे है। शहरवासी इनसे संभलकर चले इसी में समझदारी है।
डॉ. आर.के. जोशी, पशु चिकित्सक
माननीय सर्वोच्च न्यायालय और शासन के आदेशों के परिपालन के चलते श्वानों को पकड़ने पर रोक है। हालाकि निगम द्वारा समय-समय पर अभियान चलाकर श्वानों की नस बंदी की जा रही है।
मनोज पाठक, अपर आयुक्त ननि 

Related Articles

Back to top button
Close