उज्जैन

विवाह समारोह के लिए अनुमति नहीं लेना पड़ेगी

Publish Date: | Sun, 22 Nov 2020 12:44 AM (IST)

उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना संक्रमण की ताजा स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में क्या गाइडलाइन हों, इसको लेकर शनिवार को आपदा प्रबंधन समूह की बैठक हुई। राज्य शासन द्वारा 22 नवंबर को जारी होने वाली गाइडलाइन में शामिल करने के लिए कई सुझाव और अनुशंसाएं भेजी गईं। इनमें शादियों के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं होने और बारात में 50 लोगों को अनुमति देने की अनुशंसा भी शामिल है।

बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव, विधायक पारस जैन, सांसद अनिल फिरोजिया, कलेक्टर आशीष सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री सत्येंद्र कुमार शुक्ला, एडीएम नरेंद्र सूर्यवंशी आदि मौजूद थे। समूह

द्वारा राज्य शासन को अनुशंसा की गई कि विवाह समारोह के लिए 100 के स्थान पर 200 व्यक्तियों को समारोह में शामिल होने की छूट दी जाए। इसी तरह विवाह समारोह के आयोजन के दौरान डीजे पर संगीत बजाने की अनुमति देने की अनुशंसा की गई।

शासन की गाइडलाइन के अनुसार ही निर्णयः कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि राज्य शासन द्वारा 22 नवंबर को विवाह एवं अन्य आयोजनों तथा कोरोना वायरस बचाव के लिए किए जाने वाले उपायों को लेकर नवीन गाइडलाइन जारी की जा रही है। इसी तारतम्य में जिला आपदा प्रबंधन समूह द्वारा उक्त अनुशंसा नवीन गाइडलाइन में शामिल करने के लिए भेजने का निर्णय लिया गया है। शासन द्वारा तय की गई गाइडलाइन के अनुसार ही स्थानीय स्तर पर निर्णय लागू किए जाएंगे।

कालिदास समारोह पर अंतिम निर्णय आज, प्रस्ताव भेजा

उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अखिल भारतीय कालिदास समारोह इस साल होगा या नहीं, इस पर शनिवार को भी पसोपेश की स्थिति बनी रही। उज्जैन से प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक पारस जैन चाहते हैं कि कोविड-19 नियमों का पालन करते हुए समारोह हो और कार्तिक का मेला भी लगे। इस पर अंतिम फैसला रविवार को राज्य शासन की ओर से होगा। आपदा प्रबंधन समूह की बैठक में आयोजन को लेकर सुझाव और एक प्रस्ताव बनाकर राज्य शासन को भेज दिया गया है। कार्यक्रम सात के बजाय तीन दिन, कालिदास अकादमी के पं. सूर्यनारायण व्यास संकुल में कराने और शोभायात्रा केवल प्रतीकात्मक रूप से निकालने का प्रस्ताव है।

मालूम हो कि सात दिवसीय अखिल भारतीय कालिदास समारोह दो-तीन अपवादों को छोड़ दें तो हर साल देव प्रबोधिनी एकादशी से शुरू होता है। इसकी तैयारियां करीब 2 महीने पहले ही शुरू हो जाती है। देव प्रबोधिनी एकादशी इस बार 25 नवंबर को है। यानी समारोह में अब सिर्फ 4 दिन शेष बचे हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि सरकार अब तक यह तय नहीं कर पाई है कि समारोह करें या नहीं। हालांकि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रयास से कोरोना संक्रमण को ध्यान में रख संक्षिप्त रूप से समारोह कराने का प्रस्ताव तैयार किया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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