उज्जैन

रात का तापमान 28 डिग्री इस सीजन में सबसे ज्यादा

Publish Date: | Sat, 14 May 2022 01:07 AM (IST)

उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। तेज धूप और हवाओं के कारण मौसम के तेवर भी बदल गए हैं। शुक्रवार को दिन के साथ रात भी गर्म रही। न्यूनतम पारा डेढ़ डिग्री उछलकर 28 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। यह इस सीजन का सर्वाधिक रहा। दिन का अधिकतम तापमान लगातार दूसरे दिन 44 डिग्री पार रहा। बढ़ती गर्मी को देख मौसम विभाग ने उज्जैन को ओरेंज जोन में सम्मिलित कर लिया है और शनिवार से यहां लू चलने का अनुमान जताया है। लू से बचने के लिए लोगों को हल्के रंग के सूती वस्त्र पहनने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और सिर को कपड़े या टोपी से ढंककर रखने की सलाह दी है। कहा है कि फिलहाल गर्मी से राहत की उम्मीद नहीं है।

जीवाजी वेधशाला के अनुसार 24 घंटों में रात का न्यूनतम तापमान 26.5 डिग्री से उछलकर 28 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। दिन का अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री से मामूली लुढ़ककर 44.4 डिग्री सेल्सियस पहुंचा। गर्म हवाएं हवा सुबह 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली। तेज धूप और गर्मी अधिक होने से लोग बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकले। परिणामस्वरुप दोपहर के वक्त गली-मोहल्लों की सड़कों पर सन्नााटा छाया रहा। मुख्य सड़कों पर आवाजाही सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम रही। जो लोग घर से बाहर निकले, उन्होंने अपने सिर और चेहरे को कपड़ों से ढंककर रखा।

भीषण गर्मी से इंसान ही नहीं, पशु-पक्षी भी बेहाल

भीषण गर्मी से इंसान ही नहीं, पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। अनाज- पानी की तलाश में वन क्षेत्र से निकल कई पशु-पक्षी शहर की ओर आने लगे हैं। लक्ष्‌मीनगर क्षेत्र में महीनेभर से रोज दोपहर से शाम के वक्त बंदरों का उत्पात मचाते देखा जा रहा है। पशु एवं पर्यावरण प्रेमी इनके लिए खुले में दाना-पानी भी रख रहे हैं।

तेजी से सूख रहे जल स्रोत

तेज धूप के कारण जमीन फट रही है। जल स्रोत और हरे-भरे पेड़ तेजी से सूख रहे हैं। भूजल स्तर गिर रहा है। देवास रोड से जुड़ी कई कालोनियों में हैंडपंप, बोरिंग सूखने पर जल संकट उत्पन्ना हो गया है। लोगों को निजी तौर पर टैंकर से पानी खरीद पानी की पूर्ति करना पड़ रही है। भूजल सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार उज्जैन में भूजल स्तर 15 मीटर से भी नीचे चला गया है। शहर से 12 किलोमीटर दूर उंडासा तालाब में पानी नीचे उतरने से सीढ़ियां नजर आने लगी हैं। ऐसे में अब शहर में जल प्रदाय के लिए इस तालाब का पानी लेना लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने बंद कर दिया है। फिलहाल शहर में जल प्रदाय गंभीर बांध, साहिबखेड़ी तालाब और शिप्रा में भरे नर्मदा जल को उपचारित कर किया जा रहा है।

गंभीर में अब 649 एमसीएफटी पानी

शहर में जलापूर्ति के मुख्य केंद्र गंभीर बांध में अभी 649 मिलियन क्यूबिक फीट (एमसीएफटी) पानी है। इतना कि डेढ़ माह आसानी से शहर में प्रदाय किया जा सकता है। इधर, जल संसाधन विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार जिले के आधे से ज्यादा तालाब सूख चुके हैं और शेष सूखने की कगार पर हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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