उज्जैन

भ्रष्टाचार के केस में उज्जैन के चार और पूर्व कलेक्टर आरोपित

Publish Date: | Sat, 21 Nov 2020 12:09 AM (IST)

उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। दताना मताना क्षेत्र में स्थित हवाई पट्टी की मरम्मत और वसूली में हुई गड़बड़ी के मामले में उज्जैन के चार और कलेक्टरों को लोकायुक्त ने आरोपित बनाया है। इनमें पूर्व कलेक्टर और वर्तमान में इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह भी शामिल हैं। सिंह के अलावा नीरज मंडलोई, संकेत भोंडवे और शशांक मिश्र का नाम भी शामिल है। इस मामले में अब तक उज्जैन के 9 पूर्व कलेक्टरों सहित कुल 20 आरोपित बन चुके हैं।

बता दें कि साल 2006 में मप्र शासन ने दताना-मताना हवाई पट्टी यश एयरवेज लिमिटेड को डेढ़ लाख रुपये मासिक किराए पर 10 साल की लीज पर दी थी। अनुबंध के अनुसार पीडब्ल्यूडी को हवाई पट्टी का संधारण करना था। मगर इसके लिए राशि यश एयरवेज को जमा करानी थी। इसके अलावा हवाई पट्टी का किराया वसूलने, यहां खड़े होने वाले विमानों से शुल्क वसूलने सहित रखरखाव की जिम्मेदारी तत्कालीन कलेक्टरों की थी। यश एयरवेज ने मात्र वर्ष 2006-07 का किराया जमा करवाया था। इसके बाद वर्ष 2013 तक कोई किराया नहीं दिया। वर्ष 2013 के बाद हवाई पट्टी का संचालन भी बंद कर दिया था। इस दौरान यश एयरवेज ने हवाई पट्टी का रखरखाव भी नहीं किया था।

नवंबर 2019 में दर्ज हुआ केस

अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने यश एयरवेज और हवाई पट्टी पर खड़े होने वाले अन्य विमानों से किराया वसूल नहीं किया। इसके अलावा यह भी नहीं देखा कि हवाई पट्टी का संधारण हो रहा है कि नहीं। जांच के बाद लोकायुक्त पुलिस ने नवंबर 2019 में लोकायुक्त क े सेवनिवृत्त डीजीपी अरुण गुर्टु, उज्जैन के पांच पूर्व कलेक्टर शिवशेखर शुक्ला, अजातशत्रु श्रीवास्तव, डॉ. एम गीता, बीएम शर्मा और कवींद्र कियावत पर केस दर्ज किया था। इसके अलावा यश एयरवेज के यशराज टोंग्या, भरत टोंग्या, दिलीप रावल, शिरीश दलाल, वीरेंद्र कुमार जैन, शिवरमण, दुष्यंतलाल के नाम शामिल किए गए थे। अधिकारियों सहित कुल 16 के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 व आइपीसी की धारा 120 बी के तहत केस दर्ज किया गया था।

हाईकोर्ट भी पहुंचा मामला

ये मामला जबलपुर हाईकोर्ट भी पहुंचा था। उज्जैन के पूर्व कलेक्टर और वर्तमान में भोपाल के संभागायुक्त कवींद्र कियावत ने केस खारिज करने की याचिका लगाई थी। मगर कोर्ट ने 21 सितंबर 2020 को याचिका खारिज करते हुए लोकायुक्त को 9 महीने में पड़ताल पूरी करने के निर्देश दिए थे। जांच के दौरान जिले के पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह (वर्तमान में इंदौर कलेक्टर), नीरज मंडलोई (वर्तमान में प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग), संकेत भोंडवे (वर्तमान में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के ओएसडी) और शशांक मिश्र (वर्तमान में मप्र ग्रामीण सड़क विकास निगम के सीईओ) की भी कथित भूमिका सामने आने पर इन्हें भी आरोपित बना लिया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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