उज्जैन राजनीति

नए चेहरे को तलाश रही भाजपा आगर में

सुरेखा तंवर हो सकता है बेहतर विकल्प

आगर । विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को जहां नए चेहरे की तलाश है, वहीं कांग्रेस अपने पुराने हारे हुए प्रत्याशी पर एक बार फिर दांव लगाने की तैयारी में दिख रही है । चिंतामन मालवीय, रेखा रत्नाकर और सुरेखा तंवर भाजपा से तो कांग्रेस से विपिन वानखेड़े और राजकुमार गोरे जैसे नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं।
अजा के लिए आरक्षित इस सीट पर भाजपा से उज्जैन-आलोट से सांसद रहे चिंतामन मालवीय दौड़-धूप कर रहे हैं । मगर जिन कारणों से उन्हें लोकसभा चुनाव में पार्टी ने नकार दिया था, वही यहां भी उनकी राह में रोड़ा बन रहे हैं । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपने खासमखास रहे दिवंगत विधायक मनोहर ऊंटवाल की पत्नी को यहां से प्रत्याशी बनाना चाहते हैं, नहीं तो उनके पुत्र मनोज ऊंटवाल से उम्मीद की जा रही है कि वे सिंपैथी वोट ले सकेंगे, किंतु उनकी अपनी ही पार्टी में शिवराज की ऐसी राय पर सहमति नहीं है । इसकी एक बड़ी वजह भी है कि ऊंटवाल स्वयं जीत के बाद क्षेत्र से दूर हो गए थे। पार्टी नहीं भूली है कि उनकी पिछली जीत का अंतर बहुत घट गया था। फिर उनकी पत्नी और पुत्र की यहां कोई राजनीतिक जमीन भी नहीं है । दूसरी तरफ कांग्रेस के हारे प्रत्याशी वानखेड़े यहां हार के बाद भी क्षेत्र में डटे दिखे हैं । ऐसे में भाजपा जिताऊ चेहरे की तलाश में है । रेखा रत्नाकर भी इस दौड़ में नई नहीं है । वह पूर्व में विधायक रह चुकी हैं। पिछली दफा भी उनका नाम चला परंतु पुराना चेहरा होने से दब गया। फिर पार्टी भी नहीं चाहेगी कि परिवारवाद दिखे। वर्तमान में उनके भाई अनिल फिरोजिया सांसद हैं। जातिगत समीकरण में भी वे बहुत पिछड़ रही हैं। ऐसे में इस रेस में सुरेखा तंवर का नाम तेजी से उभर रहा है। भाजपा यहां से श्रीमती तंवर के नाम पर विचार कर रही है । अजा मोर्चा महिला विंग की संभागीय प्रभारी सुरेखा तंवर का नाम संसदीय चुनाव में भी चला था, किंतु संघ से महेंद्र सिंह सोलंकी का नाम ऊपर से बढ़ जाने से वे पिछड़ गई थी। इस बार उनका नाम इसलिए भी वजनी है क्योंकि वह वाल्मीकि समाज से आती हैं । मनोहर ऊंटवाल के निधन के बाद इस समाज से कोई प्रतिनिधित्व नहीं रह गया है। वाल्मीकि समाज को पार्टी नाराज नहीं करना चाहेगी । श्रीमती तंवर मनोहर ऊंटवाल के चुनाव में सक्रिय दिखीं थीं। तभी से क्षेत्र मैं उनकी खासी पकड़ बताई जा रही है । मुख्यमंत्री शिवराज वाल्मीकि समाज को वचन दिए हैं कि विधानसभा उनके प्रतिनिधित्व से रहित नहीं रहेगी। ऐसे में भी यदि दिवंगत श्री ऊंटवाल के समाज से कोई जिताऊ चेहरा दिखता नजर आता है तो वह सुरेखा तंवर हैं।
इधर कांग्रेस में राजकुमार गोरे का नाम भी लिया जा रहा है, किंतु वे 2014 में बुरी तरह हार चुके हैं। यूं तो विपिन वानखेड़े भी पार्टी को पिछले चुनाव में खुशी नहीं दिला सके, किंतु उनके क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने और पार्टी के पास कोई बेहतर विकल्प नहीं होने से फिर से उन्हीं पर दांव खेलने की पार्टी सोच में है ।

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