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चीन पर कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित गरीब देशों को कर्ज में राहत देने का दबाव : रिपोर्ट

प्रतीकात्मक तस्वीर

बीजिंग:

कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर इससे प्रभावित देशों का कर्ज समाप्त करने को लेकर शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के बीच बनी सहमति के तहत अब चीन के ऊपर गरीब देशों के कर्ज की किस्तें माफ करने का दबाव बढ़ने लगा है. एक स्थानीय अखबार ने इस आशय की एक खबर प्रकाशित की है. हांगकांग स्थित अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, विश्वबैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास ने चीन से ऐसे गरीब देशों के कर्ज की किस्तें माफ करने का आह्वान किया है. 

उन्होंने आरोप लगाया है कि चीन के सरकारी बैंकों के पास पूंजी होने के बावजूद वे ‘जी20 की कर्ज की किस्तों में राहत देने की पहल (डीएसएसआई)’ में पूरी तरह भाग नहीं ले रहे हैं. मालपास ने फ्रैंकफर्ट स्कूल ऑफ फाइनेंस एंड मैनेजमेंट द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘एक अतिरिक्त कारक है कि कर्ज की मौजूदा लहर में नये सरकारी बैंकों विशेषकर चीन के कई अच्छी तरह से पूंजीपोषित बैंकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है.”

मालपास ने कहा, “उन्होंने नाटकीय ढंग से अपने पोर्टफोलियो का विस्तार किया है पर ऋण पुनर्निर्धारण प्रक्रियाओं में पूरी तरह से भाग नहीं ले रहे हैं.” जी 20 देशों के वित्त मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की 15 अप्रैल को हुई ऑनलाइन ग्रीष्मकालीन बैठक में मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए 77 गरीब देशों के कर्ज की किस्तों को कुछ समय के लिये माफ करने पर सहमति व्यक्त की थी. डीएसएसआई के तहत एक मई से 2020 के अंत तक चुकायी जाने वाली 12 अरब डॉलर की किस्तों को चुकाने का समय टाला गया है.

चीन की सरकारी मीउिया सीजीटीएन के एक आलेख अनुसार, 100 से अधिक कम आय व मध्यम वाले देशों को अभी भी 2020 में किस्तों के रूप में 130 अरब डॉलर का भुगतान करना होगा. चीन सबसे बड़ा द्विपक्षीय कर्जप्रदाता है, क्योंकि वह अपनी महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत सैकड़ों परियोजनाओं के लिये कर्ज बांट रहा है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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